धर्मक्रिया
देवी पक्ष रीडर
अंक एक · शारदीय 1433डेस्क से इत्मीनान के लेखDharmKriya · कोलकाता
01विसर्जन · मुख्य
बिसर्जन: हुगली पर लंबी विदाई
कोलकाता माँ को कैसे विदा करता है: बरन की विदाई और सिंदूर खेला का लाल तूफ़ान, ढाक के आगे-आगे घाट तक शोभायात्रा, हुगली में विसर्जन, और रेड रोड का वह कार्निवल जो अब उत्सव का समापन करता है।
DharmKriya Desk18 सित॰ 20268 मिनट
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मुख्यसूची
5 लेख- 02भोजनभोग: पंडाल के पीछे की रसोईबड़े कड़ाह में पकी खिचुड़ी, लाबड़ा और पायेस, देवी के चरणों में भोग लगी और पूरे पाड़े में बँटी। कौन पकाता है, क्या पड़ता है, और इसे कैसे ठीक से खाया जाए।19 सित॰ 20266 मिनट
- 03शिल्पढाक की कला: दुर्गा पूजा की धड़कनढाकी कौन हैं, कहाँ से आते हैं, ढाक कैसे बनता और बजता है, और क्यों बिना ढाक की पूजा शुरू ही नहीं मानी जाती।18 सित॰ 20267 मिनट
- 04शिल्पकुमारटुली: जहाँ देवी गढ़ी जाती हैंउत्तर कोलकाता के कुम्हार-मोहल्ले की सैर: नदी की मिट्टी और पुआल के ढाँचे, सूखती और चटकती परतें, चोक्खु दान की एक ब्रश-रेखा, और वे परिवार, जिनमें अब स्त्रियाँ भी बढ़ती जा रही हैं, जो यहाँ तीन सौ साल से दुर्गा गढ़ रहे हैं।18 सित॰ 20267 मिनट
- 05विरासतबनेदी बाड़ी: पंडाल से पहले की पारिवारिक पूजाएँसार्वजनिन समितियों और उनके थीम पंडालों से पहले दुर्गा पूजा पुरानी कोलकाता के बड़े घरानों की थी, हर परिवार की अपनी हवेली के ठाकुरदालान पर होती। उनमें से कई आँगन आज भी हर शरद में चार दिन अपने द्वार खोलते हैं। बनेदी पूजा क्या है, ये घराने कैसे बने, और उनमें शालीनता से कैसे खड़े हों।18 सित॰ 20266 मिनट






